

जब भैंस-बकरी चराते थे जीतू रायइमेज स्रोत, Jitu Rai23 सितंबर 2014भारत को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने वाले जीतू राय का बचपन नेपाल में ग़रीबी में बीता.वरिष्ठ खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम से बातचीत में उन्होंने कई बातें साझा कीं.पढ़िए ये बातचीत जीतू राय की ज़ुबानीमुझे बचपन में पढ़ने का समय नहीं मिलता था. मैं भाग भाग कर नौ बजे स्कूल पहुंचता था.वहां पहुंच कर टाइम पास करता था क्योंकि ये पता नहीं था कि कैसे पढ़ना है.जब घर वापस आता था तो मां बोलती थी कि घर में पड़ा बासी भात खा कर भैंस या बकरी चराने चले जाओ.गोरखा रेजिमेंट में भर्तीमेरा जन्म नेपाल में हुआ और मेरी इच्छा थी कि मैं गोरखा रेजिमेंट ज्वॉइन करूं. इसलिए मैं भर्ती होने भारत आ गया.मैंने सोचा था कि ब्रिटिश आर्मी ज्वॉइन करूँगा लेकिन उसकी भर्ती एक दिन बाद होने वाली थी इसलिए सोचा पहले भारतीय आर्मी में ही कोशिश कर लूँ.इमेज स्रोत, Gettyमैं पहले ट्रायल में ही भारतीय आर्मी में चयनित हो गया तो इसी में सेवा जारी रखी.छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ेंसबसे अधिक पढ़ी गईंसमाप्तमैंने कभी इस मुक़ाम के बारे में नहीं सोचा था, मेरे लिए तो गोरखा रेजिमेंट में भर्ती होना ही काफ़ी था.एशियाई खेलों में तो
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