

इमेज स्रोत, ISROAuthor, पल्लव बागला और सुभद्रा मेननपदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए23 सितंबर 2014अपडेटेड 24 सितंबर 2014भारत के <link type="page"><caption> मंगल अभियान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140213_mars_scientist_sampat_tk.shtml" platform="highweb"/></link> का निर्णायक चरण 24 सितंबर को सुबह यान को धीमा करने के साथ ही शुरू होगा.इस मिशन की सफलता उन 24 मिनटों पर निर्भर करेगी, जिस दौरान यान में मौजूद इंजिन को चालू किया जाएगा.इसमें इस बात की सावधानी रखनी होगी कि यान इतना धीमा न हो जाए कि मंगल की सतह से टकरा जाए और उसकी रफ़्तार इतनी भी तेज़ न हो कि वो मंगल के गुरुत्वाकर्षण से बाहर अंतरिक्ष में खो जाए.अगर यह अभियान पहले प्रयास में ही सफल रहता है तो भारत एशिया ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जिसने एक ही प्रयास में अपना अभियान पूरा कर लिया था.चीन भले ही अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत से आगे रहा है लेकिन उसे भारत से बड़ी चुनौती मिलने वाली है.पढ़िए विश्लेषणइस समय दुनिया भारत और चीन के बीच 21वीं सदी की अभूतपूर्व एशियाई अंतरिक्ष दौड़ की गवाह बन रही है. भारत लाल ग्रह पर चीन से पहले पहुंचने की कोशिश कर रहा है.लेकिन चीन ने 2003 में ही अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजकर भारत को पछाड़ दिया
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